खेतों में वर्मी कम्पोस्ट खाद डालने के फायदे व इसे बनाने की प्रक्रिया


किसान साथियों आज हम बात करने वाले है एक ऐसी जैविक खाद के बारे में जिससे आपके खेत की मिट्टी की उर्वरता बढ़ जाएगी तथा पैदावार भी बढ़ जाएगी | यह है वर्मी कम्पोस्ट खाद या जिसे कृषि विशेषज्ञ ब्लैक गोल्ड भी कहते है | साथियों, इस खाद के फायदों के बारे में बहुत से लोगो को पता ही नही है भले ही यह खाद किसानो के खेत में केंचुए प्राकृतिक रूप से करते है | लेकिन इसे वाणिज्यिक स्तर पर बना कर इसके उपयोग के बारे में बहुत ही कम लोग जानते है | तो आज हम इस आर्टिकल में इसको बनाने की प्रोसेस तथा इससे जुड़े आपके सवालों के बारे में जानेंगे |


वर्मी कम्पोस्ट खाद क्या है ?


साथियों वर्मी कम्पोस्ट खाद केंचुओ द्वारा बनाई जाती है | साथियों केंचुए आर्थ्रोपोडा संघ के जंतु है | जो किसानो के अनजाने मित्र कहलाते है | केंचुए जब खेत में ह्युमस को खाकर अपना अपशिष्ट भुरभुरी मिट्टी के रूप में बाहर निकालते है | यह खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करती है | लेकिन इस प्रक्रिया को हम केंचुओ को गोबर या यह भी ह्युमस ही होती है उससे हम इसे ज्यादा मात्रा में बनाकर इसकी खेती कर सकते है | तथा किसान भाइयो की मदद कर सकते है |
किसान साथियों इसे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानने से पहले इससे फायदे जान लेते है |


वर्मी कम्पोस्ट खाद के फायदे


गोबर का सही उपयोग


किसान साथी बारिश के पहले गर्मी के मौसम में अपने खेत में गोबर की खाद डालते है | परन्तु वह गोबर की खाद खेत को इतना ज्यादा फायदा नहीं पहुँचाती है क्योंकी उस खाद में गर्मी होती है | लेकिन वर्मी कम्पोस्ट की खाद इससे कम समय में तैयार हो जाती है तथा ज्यादा फायदा पहुँचाती है |


गाय की पालना


किसान साथी खेती के साथ साथ पशुपालन भी करते है | जिससे उन्हें दूध की प्राप्ति होती है | लेकिन गाय के अपशिष्ट जेसे गोबर, गौमूत्र ये खेत में उर्वरता बढाने के काम आते है | बहुत से किसान साथियों की गायें दूध नहीं देती है या वे बूढी होती है | इसलिए वे उन्हें आवारा पशुओ की तरह छोड़ देते है जिससे गौहत्या होती है |
हमारा किसान साथियों से आग्रह है कि वे गायो को आवारा न छोड़े बल्कि उनसे प्राप्त गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाए जिससे उनकी आय बढती है | तथा खेत कि पैदावार भी बढती है |


रासायनिक उर्वरक पर कम निर्भरता


किसान साथियों वर्मी कंपोस्ट खाद यूज़ करने से आपको महँगे रासायनिक उर्वरकों की जरुरत कम पड़ती है | जब आप पहली बार अपने खेत में वर्मी कंपोस्ट खाद डालते है तो आपको थोड़े कम रासायनिक उर्वरक यूज़ करने है | फिर दुसरे वर्ष उससे भी कम रासायनिक उर्वरक आपको उपयोग करने है | इस तरह तीन से चार साल में आपको रासायनिक उर्वरक पुर्णतः उपयोग में नहीं लाने होते है या उनका उपयोग बंद कर देना है |


आपको एक दम से अपने खेत में पहले ही वर्ष रासायनिक उर्वरक बंद नहीं करने है क्योंकी आपके खेत उन रासायनिक उर्वरको के आदि हो चुके है | अतः आपको वर्मी कंपोस्ट का उपयोग करते हुए अन्य जैविक नुस्खो के साथ रासायनिक उर्वरको का उपयोग बंद कर देना है |

खेत की पैदावार में बढ़ोतरी तथा मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि


किसान साथियों, कई वर्षो से रासायनिक खाद के उपयोग से आपके खेत की मिट्टी की उर्वरता में कमी हुई है | तथा इनके लगातार उपयोग से खेतो की मिट्टी की लवणीयता में वृधि हुई है |
वर्मी कंपोस्ट खाद के उपयोग से आपके खेत की पैदावार में धीरे धीरे आपेक्षिक वृद्धि होती है, तथा मिट्टी की उर्वरता तथा फसल की शुद्धता में भी वृद्धि होती है |

वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया


सबसे पहले आप गोशाला या किसी डेयरी फार्म हाउस से 20 से 30 दिन पुराना गोबर इकठ्ठा कर लीजिये | इसकी मात्रा लगभग एक ट्रैक्टर ट्रोली भर के होनी चाहिए | इसे आप एक पेड़ के नीचे इकठ्ठा कर लीजिये | इसको ठंडा करने करने के लिए इस पर 3 दिन तक पानी से छिडकाव कीजिये | इससे इसके अन्दर की गर्मी या भाप निकल जाती है |


फिर इसको हम तीन शेड के नीचे ले जाते है | तथा वहाँ हम एक प्लास्टिक कवर बिछा देते है | जो कि 25 फीट वर्गाकार का होता है | इस पर हम गोबर की बेड बनाते है | इस पर लगभग 20 गोबर की बेड बन जाती है |


एक बेड 4 फीट चौड़ी तथा 1.5 फीट ऊँची होती है | इसकी लम्बाई आप आपकी शेड की छाया के अनुसार रख सकते है | हम यहाँ पर 24 फीट इसकी लम्बाई ले रहे है | हर बेड के बीच में 1 – 1 फीट की दुरी होनी चाहिए |


इसके बाद हमें इस 24 फीट की गोबर की बेड में 12 से 13 किलो केंचुए डालने है | ये केंचुए आइसिनिया पोरिड़ाई स्पीशीज के होने चाहिए क्योंकी ये केंचुए 90% कार्बनिक पदार्थ में से 10% मिट्टी खाते है | तथा सबसे अच्छी क्वालिटी का वर्मी कंपोस्ट तैयार करते है | एक किलो कल्चर में 1200 से 1300 केंचुए होने चाहिए | यदि इससे कम होते है तो आप जहाँ से केंचुए ले रहे है वो आपको कम क्वांटिटी दे रहा है |


फिर पूरी बेड के उपर आपको इस केंचुए की कल्चर डालना है | एक मिनट में ही सारी केंचुए की कल्चर बेड में चली जाएगी | फिर आपको इस पूरी गोबर की बेड को एक घनी बेग या जुट से बनी बोरी से ढक देना है | ढकने से पहले बोरी को अच्छी तरह से गिला करके ढकना है |


इस स्पीशीज के केंचुओ को नमी तथा छाया की जरुरत होती है, क्योंकी ये छाया में सबसे ज्यादा एक्टिव रहते तथा कार्बनिक पदार्थ खाते है |


फिर इस पूरी बेड में नमी देने के लिए आप माइक्रोस्प्रिंकलर नली के उपयोग से इसमें पानी छोड़ देते है | 15 मिनट पानी देने के बाद पूरी गोबर की बेड में नमी फ़ैल जाती है | हमें गर्मियों में इसमें सुबह शाम पानी देना होता है, सर्दियों में आप 1 दिन छोड़कर दुसरे दिन पानी दे सकते है |


60 दिन बाद


60 दिन बाद जब हम इस बेड को खोलते है, तो हमें हमारी वर्मी कंपोस्ट वाली खाद तैयार मिलती है | तथा इस खाद में केंचुओ की संख्या भी काफी मात्रा में बढ़ जाती है |


वर्मी कंपोस्ट से केंचुए किस प्रकार से अलग करें


60 दिन बाद आपको गोबर की बेड में पूरा 1.5 फीट तक गड्डा करके देखना है कि इसमें वर्मी कंपोस्ट तैयार हुआ है या नहीं | अगर ये चाय पत्ती की तरह बिलकुल काला है तो आपका वर्मी कंपोस्ट तैयार है | अगर गोबर दिखाई देता है तो इसका मतलब ये कच्चा है तथा इसमें अभी और समय लगेगा |


जब आपका वर्मी कंपोस्ट चाय पत्ती की तरह बिलकुल काला हो जाता है, तो आपको अर्थवर्म रेकेट से इसको उपर उपर से कुरेद देना है, जिससे केंचुए नीचे चले जायेंगे | उपर से कुरेदी गई खाद को आप अलग एकत्रित कर लीजिये |


दूसरी विधि यह है कि दो गोबर की बेड के बीच में जो 1 फीट जगह है उसमे आप 20 दिन पुराना गोबर डाल दीजिये, जिससे बेड में से सारे केंचुए उस गोबर को खाने के लिए उस गोबर में आ जायेंगे | तथा बेड खाद को आप एकत्र कर लिजिये |
खाद में से केंचुए निकालने की तीसरी विधि यह है कि आप इस बेड में 5 से 6 गड्डे करके 10 दिन पुराने ठन्डे गोबर के गोले बनाकर उन गड्डो में डाल देंगे तथा उन्हें खाद से ढक देंगे | इससे सारे केंचुए जो बेड की पूरी खाद को खा चुके है, उस गोले के गोबर को खाने के लिए उसमे आ जायेंगे तथा फिर दुसरे दिन आप उन गोलों को बेड में से निकाल कर केंचुए अलग कर लेंगे तथा बेड में खाद बच जाएगी |

खाद को छानेंगे कैसे !


खाद को छानने के लिए आपको मशीन का उपयोग करना है | मशीन आपको जुगाड़ करके बनवानी है | जो आपके लोकल इंजिनीअर होते है, उनसे आपको वर्मी कंपोस्ट खाद को छानने की मशीन तैयार करवानी है | ये मशीन थ्रेशिंग में जो छलनी लगती है उस पर आधारित है | इसमें भी छलनी वेसे ही हिलती है जेसे थ्रेशर में होती है |


इस मशीन में आपको खाद की बेड से गमले भरकर खाद लाकर डालनी है तथा मशीन खाद को छान देती है | इसमें मोटे मोटे खाद के कण साइड में एकत्र हो जाते है तथा महीन वर्मी कंपोस्ट खाद छन जाती है | जिसे कृषि विशेषज्ञ ब्लैक गोल्ड कहते है | इसमें बिल्कुल काले कलर के तरह की क्वालिटी होती है |


केंचुए कहाँ से ख़रीदे


साथियों इस पूरी प्रक्रिया को पढने के बाद आपके मन में ये विचार जरुर आया होगा कि केंचुए कहाँ से लिए जाए | तो इसका उत्तर यह है कि समय समय पर सरकार वर्मी कंपोस्ट खाद को बढ़ावा देने के लिए कैम्प आयोजित कर केंचुए किसानो को मुफ्त में उपलब्ध करवाती है | तो आप वहाँ से केंचुए ला सकते है | या कोई किसान वर्मी कंपोस्ट बनाने का काम पहले करता है तो आप वहाँ से केंचुए खरीद सकते है |


वर्मी कंपोस्ट में उपस्थित पोषक तत्व


इस वर्मी कंपोस्ट खाद के अन्दर 1.6% नाइट्रोजन, 0.8% फोस्फोरस, 0.8% पोटाश उपस्थित होता है | इसमें नमी 30% होनी चाहिए जो FCO कंट्रोल के अनुसार होनी चाहिए |

वर्मी कंपोस्ट बनाने में कितना खर्च आता है ?
एक ट्रोली गोबर जिसमे 3 टन या 30 क्विंटल गोबर होता है उसकी कीमत लगभग 2000 रुपये होती है | इस 30 क्विंटल गोबर से आपकी 3 गोबर की बेड तैयार हो जाती है | जिसकी लम्बाई 24 फीट, ऊंचाई 1.5 फीट, व चौडाई 4 फीट होती है | इन 3 बेड में 30 क्विंटल गोबर लगता है | तथा हमें 15 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद प्राप्त होती है |

वर्मी कंपोस्ट के लाभ


इस प्रकार 30 क्विंटल गोबर से आप 9000 रुपये की वर्मी कंपोस्ट खाद तथा 20000 रुपये की राशि तक के केंचुए बेच सकते है |
यदि कोई किसान 20 ट्रोली गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनान शुरू करता है तो वह एक ट्रोली खाद के 9000 रुपये के हिसाब से लगभग 200000( दो लाख रूपए) की वर्मी कंपोस्ट खाद तथा एक ट्रोली खाद के केंचुओ की 20000 रुपये के हिसाब से 400000 ( चार लाख रुपये ) तक के केंचुए बेच सकता है | तथा लाभ कमा सकता है | अगर इससे ज्यादा लाभ प्राप्त करना हो तो किसान गोबर के बेड की संख्या बढ़ा सकते है |

किसान साथियों, आशा करते है कि आप इस आर्टिकल को पढ़कर केचुओ से वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने की प्रक्रिया तथा इसके लाभ तथा खर्च के बारे में जान चुके होंगे तथा अपने खेतो में वर्मी कंपोस्ट खाद का उपयोग करेंगे, धन्यवाद |

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