खेती के लिए सोलर तकनिकी केसे आई जाने टेक मेवाड़ी के साथ !!

इस ब्लॉग का उदेश्य है खेती के लिए सोलर तकनिकी के बारे में यह जानना है कि खेती के लिए सोलर तकनिकी केसे आई !! किसान साथियों को खेती में यदि कुए या बोरिंग में पानी अच्छा है !! लेकिन पानी बाहर नहीं निकाल पाए तो वह पानी कुछ काम का नही है !! आइये कुछ पोराणिक बाते देखते है की पहले कुए से किसान साथी पानी केसे बाहर निकाल पाते थे !!

रहट

खेती में सिंचाई की सबसे पोराणिक पद्धति रहट सिंचाई है रहट सिंचाई तकनीक के नाम से शायद अब अधिकतर लोग वाकिफ भी नहीं होंगे। इस सिंचाई तकनीक से किसान जहां पर्यावरण का संरक्षण करते थे वहीं बिजली और डीजल की बचत भी होती थी। वर्तमान में बदलती तकनीक और विकास की इस रफ्तार में किसानों को भी पुरानी परंपराओं को बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। लेकिन उसके बावजूद भारत के कई गांवो में पुरानी तकनीक से ही सिंचाई कि जाती है। लेकिन अब ये तकनीक नही के बराबर दिखती है। राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में अभी भी इस तकनिक का इस्तेमाल किया जाता है। क्या है रहट सिंचाई तकनीक? दो बैलों के साथ इस सिस्टम को परंपरागत कुएं में लगाया जाता था और चेन या रस्सी में लगे डिब्बों के जरिये पानी खेतों तक पहुंचाया जाता था। इस सिस्टम में किसी तरह की बिजली अथवा डीजल का इस्तेमाल नहीं किया जाता था। महज बैलों को चलाने के लिए एक व्यक्ति की जरूरत रहती थी। किसानों की बात पर यकीन करें तो कुछ बैल इस तकनीक के लिए इतने फिट रहते थे कि वे बिना किसी व्यक्ति के इस सिस्टम को चलाते रहते थे। इससे बिजली की भी बचत रहती थी और साथ में पर्यावरण का भी संरक्षण होता था। बिना धुएं और बिना किसी ईधन के इस सिस्टम को चलाया जाता था। इससे आगे बढकर फिर चड़स आया

चड़स

खेती की सिंचाई में बड़ती तकनीकी में दूसरी पद्धति आई चड़स यह भी एक एसी पद्धति जो बिना डीजल व् बिना बिजली से कुए से पानी निकला जाता था इसमें लोहे के चड़स होते थे जिसे एक बड़े रस्से से बांध दिया जाता था और बेलो की सहायता से खीचकर बहार निकाला जाता था हर बार बेल अपने फेरे में आगे व् पीछे चलकर पानी को बहार निकलते थे और खेतो की सिंचाई होती थी !! फिर बड़ती तकनिकी ने डीजल के इंजिन शुरू किये !!

डीजल इंजिन

जेसे जेसे तकनिकी बदती गयी वेसे वेसे सिस्टम भी बदलता गया इन सभी पुराणी तकनिकी के बाद आये इंजिन जिसे चलाने के लिए डीजल का उपयोग किया जाता था और जेसे जेसे इंजिन चलता वेसे वेसे इंजिन से निकलने वाला धुँआ वातावरण को पूरा प्रदूषित कर देता जिससे मनुष्य के जीवन में कई सारी बिमारिया उत्पन्न होने लगी और धीरे धीरे डीजल के भाव भी आसमान छूने लगे और सह तकनिकी भी धीरे धीरे लुप्त हो गयी फिर लोगो के दिमाग में नए आइडिये आने शुरू हुए और एक जुगाड़ तकनिकी निकली वह थी डीजल के बजे गेस से इंजिन को चलाना आइये देखते इस तकनिकी के बारे में थोडा विस्तार से !!

गैस चलित इंजिन

सभी और से दबा हुआ किसान कुछ कुछ तो अच्छा जुगाड़ निकल ही देता है अतो चलाकर एक जुगाड़ तकनिकी गैस से इंजिन को चलाकर कुए से पानी को बाहर निकालना इस तकनिकी में इंजिन के साइलेंसर पाइप पर एक छेद क्र के गैस की नली को वाल्व की सहयता से जोड़ दी जाती है और और थोडा सा डीजल की भी जरुरत होती है पहले हेंडल से इंजिन को स्टार्ट करते समय थोडा सा डीजल की जरुरत होती है उसके बाद डीजल को बंद कर दिया है और पूरी तरह से गैस से ही इंजिन को चलाया जाता है और कुए से बाहर पानी को निकाला जाता है !!

बिजली

अब बढ़ती तकनिकी में आया बिजली से पंप को चलाकर कुए व बोरिंग से पानी को बहर निकालना इस पद्धति ने किसानो को ऐसा सिस्टम लाकर दिया कुए पर जाकर सिर्फ 1 स्विच दबाया कितने ही फिट गहराई से पानी बाहर !!

लेकिन इस पद्धति में किसानो को काफी परेशानी झेलनी पड़ी :-

बिजली का बिल सबसे बड़ी किसानो की परेशानी बिजली तो बराबर नही आएगी लेकिन बिजली का बिल जरुर बड चढ़कर जरुर आएगा बिल भरने की समस्या जितना किसान कमाएंगे नही उतना पैसा बिल में चला जाता है !!

इतना हि नही आये दिन केबल का जलना ट्रांस्फार्मर का ख़राब होना जब फसल की अति आवशयक सिंचाई करनी हो तब पूरी तरह बिजली नही आती है और फसल पूरी तरह से सुखी रह जाती है !!

सबसे बड़ी परेशानी तो तब आती है जब बिजली रत को देते है तब किसानो को पूरी रातभर जगकर खेतो में सिंचाई करनो पडती है साथ ही जहरीले जानवरों सर्प, गोयरा जैसे कई सरे जानवरों का खतरा बना रहता है इन सभी से बचने समाधान निकल कर आया सोर उर्जा !!

सोर उर्जा चलित पानी के पंप

किसानो के लिए एसी पद्धति सामने आई जिसमे न तो बिजली चाहिए न आपको डीजल तो फिर चलेगा कैसे बाह वह चलेगा सूरज देवता की रोशनी से कभी सोचा तो नही होगा कि धूप से कुओं व बोरिंग से पानी को बाहर निकाला जाएगा लेकिन आज आप देख ही रहे है सबकुछ संभव होता हुआ दिखाई दे रहा है तो आप यह जानने के इछुक होंगे कि कैसे वह है सिलिकॉन से बने सेल ओर सेल्स को एक साथ मिलाकर बनाए सोलर जिसमे वह शक्ति है जो सूरज से आने वाली रोशनी के कणो को ऊर्जा  में परिवर्तित कर देते है वही ऊर्जा आज सौर ऊर्जा के नाम से जानी जाती है !! बाजार में एसे पानी के पंप उपलब्ध है जो सोलर पर कम एम्पियर के साथ चलकर काफी अच्छा परफॉरमेंस देते है आपको हमेशा इस बात का विशेष ध्यान रखना है की सोलर पंप ही खरीदना है

किसानो के लिए सोर उर्जा एक वरदान साबित हो रहे है आइये देखते है सोर उर्जा के उपयोग करने पर कितना फायदा होने लगा :-

सबसे बड़ी समस्या का समाधान बिल भरने से छुटकारा जब आप अपने खेतो में सोलर पंप लगवा देते है तो आपको 1 बार ही इन्वेस्ट करना होता है नकी हर महीने आपको बिल भरने जाना है !!

अगर आपने खेतो में सोलर पंप लगवा दिए तो आपको खेती में रात को सिंचाई करने की जरूरत नही होगी क्योकि सोर उर्जा सिर्फ सिर्फ दिन के समय लगभग आप 10 घंटे तक चल सकते है यानि की आपको 10 घंटे बिजली मिलने वाली है

सोर उर्जा चालित पंप का सबसे बड़ा फायदा वातावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते है इतना ही नहीं अगर आप सोर उर्जा का उपयोग कर रहे है तो आप सालाना हजारो पेड़ पोधे बचा रहे है क्योकि अभी वर्तमान की बिजली जो बं रही है उसमे सबसे बड़ी भूमिका जो हे वह कोयले की और कोयले बनाने के लिए पेड़ो को काटा जाता है !!

इस तरह आप सर उर्जा का उपयोग कर के आपकी फसल को समयानुसार सिंचाई कर सकते है और अपनी आय को बड़ा सकते है

मुझे पूरी तरह विश्वास है की यह ब्लॉग आके लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ होगा आप से निवेदन है की आप को कुछ और अच सुजाव लगे तो आप कमेन्ट कर के बताये आपका फीद्बेच्क हमारे लुइए अमूल्य होता है और ज्यदा से ज्यदा इस पोस्ट शेयर करे !!

धन्यवाद !!

जय भारत !! जय राजस्थान !! जय सिया राम !!

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