संत श्री नंगा जी ने जीवित समाधी लेकर वापिस जीवित मिले भक्तो को गढ़ गिरनार !! History of Nanga ji Gadari Nilod

मेवाड़ वीरो और संतो की धरा रही है कई सारे वीर और संत हुए है उसी में एक संत मेवाड़ की पुन्य धरा पर नंगा जी धनगर हुए !! उसी समय में जो पास में एक चोकड़ी गाव है उसी गाव के कुछ ब्राम्हण दर्शन करने द्वारिकापूरी गये थे तब गढ़ गिरनार पर दर्शन करने गये तो वो वहा पर नंगाजी जीवित मोजूद मिले तो वो भी आश्चर्यचकित हो गये !! आइये आज नंगा जी (Nanga ji ) के जीवन परिचय के बारे में जानते है  !!

संत श्री नंगा जी के पवित्र स्थान पर कैसे जाये  

संत श्री श्री 1008 श्री नंगा जी बावजी का स्थान फतेहनगर से 7 किलोमीटर दूर जोयड़ा बावजी के पास ग्राम निलोद जिला चित्तोडगढ़ में आता है इस गाँव की स्थापना विक्रम संवत 1100 के आस – पास नीलकंठ ब्राह्मण ने की थी ! इस ग्राम में सबसे पहले निलोदिया भैरूजी की स्थापना की थी निलोदिया भैरूजी की स्थापना के साथ ही नीलकंठ महादेव जी की स्थापना हुई जिससे गाँव का नाम निलोद हो गया !! कुछ समय बाद खोड़ाजी भैरूजी की स्थापना लाखाजी गाडरी ने की !!

संत श्री नंगा जी का जीवन परिचय कथा सम्पूर्ण इतिहास History of Nanga ji

इस तरह लगभग 500 वर्ष बीत गए फिर लाखाजी गाडरी के वंशज भोलाजी गाडरी और नंदू बाई हुए जिनकी उम्र तो 60 साल के आस पास हो चुकी थी जिनके कोई संतान नही हुई दोनों दम्पति नंदू बाई और भोलाजी हमेशा पुत्र प्राप्ति की चिंता में डूबे रहते थे !

एक दिन का समय था नंदू बाई गाय चराने गये तो आगे कुछ बालक ग्वाले भैरूजी के भाव का नाटक कर रहे थे तभी नंदू बाई ने बालक के चरण स्पर्श कर भैरूजी से पुत्र की मांग की एक बालक ने भाव का नाटक करते हुए एक छोटा सा पत्थर लेकर नंदू बाई की गोद में रख दिया और कहा की इसे ले जाओ और 9 महीने बाद पुत्र प्राप्ति होगी जो बहुत यशस्वी होगा और सनातन को आगे बढाने वाला होगा और वो नंदू बाई उस पत्थर को घर ले आये !!

यह सब बात भोला जी को बताई तो भोला जी ने यह सब मजाक में ले लिया और कहाँ की ऐसा कुछ नही होता है लेकिन नंदू बाई ने कहा कोई बात नही मेरे लिए वो बच्चे ही भगवान का रूप है और उस पत्थर को रख दिया और समया अन्तराल एक बालक का जन्म हुआ जिनका नाम नंगा जी रखा गया  और नंगा जी काफी यशस्वी थे और संत प्रवृति के थे और उन्होंने काफी भक्ति की और उनके माता- पिता बचपन में ही देवलोक हो गये थे !!

संत श्री नंगा जी के जीवित चमत्कार

उसके बाद में नंगा जी के कई सारे चमत्कार हुए बुजुर्गो ने बताया की निलोद से चार भैरूजी के भोपाजी पास के ही गाँव चुण्डावतो की खेड़ी के पास से अगले गाँव भोजन करने जा रहे थे तो उनके मन में हुआ की हम 4 लोग भोजन करने जा रहे है अगर एक और कोई होता तो 5 लोग हो जाते तो अच्छा रहता तो वही रास्ते में ही उनको नंगा जी मिले जो तब छोटे बालक ही थे उनको साथ में ले लिया

वहा जा कर देखा की उनके हाथ में दुसरे भोपाजी की तरह गोल विटी नही थी तो वापिस लोटते वक्त जो उनके साथ भोपाजी थे उन्होंने सोचा की क्यों ना नंगाजी को भी गोल विटी पहनाइ जाए लेकिन वो अनाथ थे तो उसका खर्चा कोंन करेगा तो रास्ते में आते वक्त वो श्मशान के पास होकर गुजर रहे थे तो उन्होंने शमशान से अंगूठी साथ में ले ली !!

वो थे ही महापुरुष और फिर भैरूजी का स्थान पर उन्हें गोल विटी पहनाने का कार्यक्रम किया तो जैसे ही नंगाजी को गोल विटी पहनाने का समय हुआ नंगा जी के अंदर खुद साक्षात भैरूजी प्रवेश हुए थे यानी की भाव हुए और बोले की मै किसी भी भोपाजी के हाथ गोल विटी नही पहनूंगा अगर गोल विटी पहनानी है साक्षात यह भैरूजी मुझे पहनाएंगे !

नंगाजी भैरूजी भक्त थे भक्त की बात भगवान ने सुनी और वहां जो पाट पर रखी गोल विटी अपने आप नंगाजी भोपाजी के हाथ में प्रवेश कर गई और उसी दिन से आस – पास के लोग समज गये की यह तो कोई महापुरुष है !!

और उसके बाद में भी कही सारे चमत्कार हुए कहा जाता है की ऐसे संत थे वो कही पर भी स्नान करते थे तो उनकी धोती आसमान में सूखती थी और वो उसकी छाव में निचे चलकर आते थे !!

नंगा बावजी का सम्पूर्ण इतिहास जीवन परिचय कथा विडियो देखे

संत श्री नंगा जी बावजी का जीवन परिचय

किकावास में विधवा नारी के पुत्र की बलि को बचाना

एक चमत्कार यह हुआ की निलोद गाँव से कुछ दुरी पर किकावास नाम का एक गाँव है और वहा पर चामुंडा माता जी का स्थान है और आज भी चामुंडा माता जी के यहा भी सरवर नवरात्रि में सरवर जाते है हर माताजी के मंदिर में यही नियम रहता है नवरात्रि में 9 दिन तक भोपाजी होते है उनको वही रहना पड़ता है 9 दिन तक और फिर वो सरवर नहाने जाते है

लेकिन वह नवरात्रि के 9 बाद जब जुलुस यात्रा निकाल कर जब सरवर नहाने जाते है तो जो भी भोपाजी के 9 दिन नवरात्रि में बैठते थे सरवर नहाने पानी में जाते उन सेवक या भोपाजी की किसी कारण से मृत्यु हो जाती थी ! बारी बारी से हर वर्ष एक सेवक की मोट हो जाती थी!  

फिर धीरे – धीरे किकावास में जितने भी भील समाज के भोपाजी थे सारे ख़तम होते गये अंत में एक घर बचा था जिसमे एक विधवा महिला थी और उनका एक ही पुत्र था तो अब बारी आती है उस पुत्र की उसको 9 दिन नवरात्रि बैठना है और उसके बाद सरवर नहाने जाना है यानि की अपना जीवन दान देना था !!

वो महिला चिंता में थी तो उस चिंता- चिंता में अपने पुत्र को साथ लेकर राणावतो की सादड़ी उसके पीहर में जा रही थी वो इसी रास्ते से निकल रही थी तो जहा पर अभी नंगा जी बावजी की समाधी है वही पर वो बैठे थे तो नंगा बावजी को देख कर वह महिला उनके पास गयी की कोई भक्त है !

हमारी जरुर सहायता करेंगे तो पास आ कर बोली की जब भी हमारे ग्राम किकावास चामुंडा माता जी के वहा से नवरात्री में सरवर जाते है तो वही पर भोपाजी का देहान्त हो जाता है और सबको पता है की जो भोपाजी है उनको वहा रहना ही है !

इस बार मेरे बेटे का नंबर है अब कोन बचा सकता है मेरे पुत्र को !! ईश्वर की लीला हुई उसी समय नंगा जी बावजी के चमत्कार से और माँ जगदम्बा के चमत्कार से वो प्रथा अब बंद हो गयी है

विधवा नारी के पुत्र की बलि रह गयी और उनका वंशज रह गया तब तो एक घर था अब 30 से 35 घर हो गये है यह जो लीला साक्षात् नंगाजी बावजी की लीला थी !!

संत श्री नंगाजी की जीवन लीला समाप्त जीवित समाधी

धीरे – धीरे समय बीतता गया और नंगाजी की जीवन लीला समाप्त होने का समय आया उन्होंने विक्रम संवत 1765 चैत्र बुदी तैरस सोमवार को जीवित समाधी ली थी !! लेकिन आप भी जानते है की समाधी लेने के बाद कोई भी व्यक्ति वापिस नही दिखते है !!

लेकिन इधर समाधी ली और उसी समय में जो पास में एक चोकड़ी गाव है उसी गाव के कुछ ब्राम्हण दर्शन करने द्वारिकापूरी गये थे तो द्वारिकापूरी दर्शन करके जब वापिस आ रहे थे तब गढ़ गिरनार स्थान है वहा पर भी काफी अच्छा स्थान है तो वो वहा पर दर्शन करने गये तो वो वहा पर नंगाजी जीवित मोजूद मिले तो वो भी आश्चर्यचकित हो गये

नंगा जी बावजी ने निलोद में समाधी ली है तो यहाँ पर कैसे तो जब यह बात किसी को बताएँगे तो कोई मानेगा इस लिए नंगाजी ने अपनी दो निशानी भेट की थी एक तो उनके चलते थे वो गेडि (लकड़ी) और उनके तपस्या करने का चिमटा उन चोकड़ी के ब्राह्मणों को दिये और फिर सभी लोगो ने इस चमत्कार को भी स्वीकार किया !!

रणीया धुणी संत श्री डुंगा महाराज का सम्पूर्ण इतिहास एव सच्ची घटना Raniya Dhuni Temple

मेवाड़ के सुप्रसिद्ध संत

नंगा जी बावजी आज भी जीवित है संत श्री श्री 1008 श्री नंगा जी बावजी अमरा भगत जी से भी पहले हुए थे यानि की जो संतो का विख्यात समय था जैसे अमरा भगत जी, डुंगा माराज (बालक रावल जी ) , धुंधली मल स्वामी, नंगा बावजी, देवल रावल जी लोहार बावजी, दोला बावजी ऐसे कही सारे संत हुए थे तब यानि की यह चमत्कार हुआ करते थे !!

लेकिन वर्तमान में भी अभी महापुरुष है जैसे संत श्री श्री 1008 श्री अवधेश चेतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज दाता हुकुम सूरज कुंड जो अभी आप अनगढ़ बावजी नरबदिया में बिराजमान है और उनका एक ही लक्ष्य है की सर्व समाज को एक साथ बैठा कर खाना खिलाना और अज वहा पर हो रहा है

अगर आप नही पधारे तो जरुर दोनों स्थानों पर पधारे और यह पर नंगा जी बावजी के स्थान आपकी हर मनोकामना पूरी होती है यहा पर आपके कोई असाध्य बीमारी है या आपके परिवार में किसी भी प्रकार के कलेश विकार है तो आप यहाँ पर परिक्रमा करते हो या मन्नत मांगते है तो निश्चित रूप से आपकी मनोकामना पूरी होती है किसी भी प्रकार की पाईल्स की बीमारी है यहाँ पर परिक्रमा करके एक नारियल हवन में डालने से बीमारी दूर हो जाती है !!

नोट – यह जानकारी स्थानीय देवस्थान के पुजारी, ग्रामीण, बुजुर्गो एव सेवा समिति सदस्यों के द्वारा प्राप्त की गयी है इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटी होने पर मेवाड़ टीवी चैनल जिम्मेदार नही है !!

धन्यवाद !!

नंगा जी बावजी के फोटोज

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