घर-घर औषधि योजना में मिल रहे है फ्री में औषधीय पौधे

राजस्थान सरकार इस योजना के तहत प्रदेश के एक करोड़ 26 लाख परिवारों को आठ-आठ औषधीय पौधे निशुल्क उपलब्ध करवा रही है । इस योजना में हर एक परिवार को तुलसी, गिलोय, कालमेघ और अश्वगंधा के दो-दो पौधे मुफ्त वितरित किए जा रहे है वहीं हर परिवार को पांच साल में तीन बार आठ-आठ पौधे निशुल्क उपलब्ध करवाएंगे !

लगभग सभी गाँवो में पोधे घर घर वितरण शुरू कर दिए गए है जिसमे हर परिवार को तुलसी, गिलोय, कालमेघ और अश्वगंधा के दो-दो पौधे मुफ्त मिल रहे है

कैसे ले सकते है आप यह फ्री में औषधीय पौधे

आपको इन पोधै को कही नर्सरी से नही लेने है यह आपको हर घर के दरवाजे पर मिलेंगे इसके लिए आपको परिवार मेसे किसी का भी एक सदस्य आधार संख्या व मोबाइल संख्या से रजिस्ट्रेशन करवा कर आप इन औषधीय पौधे को मुफ्त में घर ले जा सकते है और इसे आप किसी गमले में लगा दीजिये

आइये जानते है इन औषधीय पौधे के फायदे

यह पर आपको चार प्रकार के औषधीय पौधे फ्री में दिए जा रहे है जिनके फायदे अलग अलग है और इनका उपयोग सबसे ज्यादा कोरोना से बचाव में किया गया है

तुलसी के फायदे

भारत के अधिकांश घरों में तुलसी के पौधे (Tulsi Plant) की पूजा की जाती है। हमारे ऋषियों को लाखों वर्ष पूर्व तुलसी के औषधीय गुणों का ज्ञान था इसलिए इसको दैनिक जीवन में प्रयोग हेतु इतनी प्रमुखत से स्थान दिया गया है।

औषधीय उपयोग की दृष्टि से तुलसी की पत्तियां ज्यादा गुणकारी मानी जाती हैं। इनको आप सीधे पौधे से लेकर खा सकते हैं। तुलसी के पत्तों की तरह तुलसी के बीज के फायदे भी अनगिनत होते हैं। आप तुलसी के बीज के और पत्तियों का चूर्ण भी प्रयोग कर सकते हैं। इन पत्तियों में कफ वात दोष को कम करने, पाचन शक्ति एवं भूख बढ़ाने और रक्त को शुद्ध करने वाले गुण होते हैं।

तुलसी की 5-7 ताजी पतियों को चाय के साथ उबालकर पिने से जुकाम, खांसी, बुखार से राहत मिलती है !

तुलसी की 3-4 पत्तिया को रोज खाने से रोग प्रति रोधक क्षमता (इम्युनीटी) को बढ़ाती है !

तुलसी की जड़ को १ चम्मच चूर्ण को १ गिलास पानी के साथ उबालकर १ कप लेने से मलेरिया की कमजोरी दूर होती है

तुलसी के पुरे पोधे का चूर्ण 1 चम्मच रोज सेवन करने से यह मधुमेह रोग को दूर करता है

अश्वगंधा के फायदे

 शरीर को ताकत मिलती है। सूजन कम करने के साथ दमा, खांसी, हृदय से जुड़ी तकलीफों में, गर्भवती महिला को पोषण देता है।

असगंधा की 10 ग्राम जड़ों को कूट लें। इसमें 10 ग्राम मिश्री मिलाकर 400 मिलीग्राम पानी में पकाएं। जब इसका आठवां हिस्सा रह जाए तो आंच बंद कर दें। इसे थोड़ा-थोड़ा पिलाने से कुकुर खांसी या वात से होने वाले कफ की समस्या में विशेष लाभ होता है।

अश्‍वगंधा की जड़ का चूर्ण 2 ग्राम की मात्रा का जल के साथ सेवन करें। इससे सीने के दर्द में लाभ (Ashwagandha Powder benefits) होता है।

अश्‍वगंधा चूर्ण में बराबर भाग में गिलोय का चूर्ण मिला लें। इसे 5-10 ग्राम शहद के साथ नियमित सेवन करें। इससे पेट के कीड़ों का उपचार होता है।  

अश्‍वगंधा चूर्ण 1 चम्मच अश्‍वगंधा को 1 चम्मच घी व 1 कप दूध के साथ देने पर यह बालको की शारीरिक कमजोरी को दूर करता है !

कालमेघ के फायदे

वायरल संक्रमण से बचने के लिए कालमेघ का सेवन किया जा सकता है। दरअसल, कालमेघ में एंटी-वायरल गुण पाए जाते हैं, जो वायरल संक्रमण को रोकने में सहायता करता है।

अगर आप अपच की समस्या से परेशान हैं, तो इस समस्या का हल भी आपको कालमेघ के जरिए मिल सकता है। कालमेघ में ऐसे विशेष गुण पाए जाते हैं, जो अपच की समस्या को दूर कर सकते हैं 

  • कालमेघ चूर्ण का सेवन पानी के साथ किया जा सकता है।
  • इसकी पत्तियों के अर्क का सेवन किया जा सकता है।
  • इसकी पत्तियों के पेस्ट को घाव पर लगाया जा सकता है।
  • कालमेघ की पत्तियों को ब्लेंडर में पानी के साथ घोल कर जूस के रूप में पी सकते हैं।

गिलोय के फायदे

कोरोना को हराने में गिलोय का काढ़ा सर्वोतम रहा गिलोय के बहुत सारे फायदे है

डायबिटीज रोगियों के लिए गिलोय के फायदे अनेक हैं. मधुमेह में गिलोय के फायदे ब्लड शुगर कंट्रोल करने के साथ पाचन तंत्र बेहतर करती है. शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए गिलोय फायदे मंद होती है.

गिलोय को दूध में उबालकर पीने से जोड़ों का दर्द कम होता है। इसके अलावा अदरक के साथ गिलोय का सेवन करने से रूमेटाइड अर्थराइटिस जैसी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। गिलोय के रस में हड्डी मजबूत करने वाले एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों की भरमार होती है।

इसी तरह यदि आपको मोसमी बीमारी जैसे सर्दी- जुकाम रहता है है तो आप इन चारो को अदरक, कालि मिर्च, दालचीनी, का काढ़ा बनाकर पीते है तो निश्चित रूप से रहत मिलती है

संदर्भ

राजस्थान सरकार ने जो मुहीम चलाई है जो सभी के लिए फायदेमंद है आपसे निवेदन है की इन पोधे का सही से ध्यान रख कर उगाये और बीमारी से राहत पाए !!

धन्यवाद

गमेर सिंह राणावत

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