मेवाड़ राजस्थान की जमींन पर हिमाचली एप्पल की खेती सोनियाणा कपासन …….

Apple Cultivation in Rajasthan Mewar Vinod Jat Soniyana Chitorgarh

@खेतिकिसानी

राजस्थान की जलवायु की बात करे तो यहाँ पर जितनी गर्मी पड़ती है उससे ज्यादा सर्दी पडती है साथियों जहा पर किसान एक और धरना प्रदर्शन को लेकर सडको पर उतर रहे है वाही पर राजस्थान मेवाड़ के किसान खेती में नवाचार ला रहे है यदि आपके अंदर जुनुन है और किसी कार्य को करने की जिद है तो वह कार्य होकर रहता है इसी प्रकार चितोड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड के सोनियाणा गांव के विनोद कुमार जाट ने अपने मेवाड़ की जमींन पर एप्पल की खेती कर दिखाई !!

एप्पल के पौधे के साथ किसान विनोद जाट सोनियाणा

चितोड़गढ़ जिले के भदेसर उपखंड के सोनियाणा गांव के विनोद कुमार जाट जो की एक नवाचार किसान है आये दिन कुछ नया करने के विचार में रहते है विनोद ने सोसियल मीडिया का पूरा सदपयोग किया और कर दिखाया ऐसा जो कोई नही कर सकता है !!

हिमाचल प्रदेश से मंगवाए एप्पल के 150 पौधे  50 बचे

किसान का कहना है की उन्होंने यह कार्य सोशियल मिडिया पर विडियो देखकर किया उनको पता लगा की राजस्थान में होने वाले एप्पल के पौधे  हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के किसान हरीमन शर्मा ने गर्म इलाकों के अनुकूल सेब के पौधे तैयार किए हैं, जिसे एचआरएमएन-99 का नाम दिया है।

विनोद ने हरिमन शर्मा से सम्पर्क करके कुल 150 पौधे 12000 रुपये में लाये थे जिसमे से 100 पौधे नष्ट हो गए और 50 पौधे सही बचे ! किसान ने बताया की इनकी देखरेख के लिए सोशियल मिडिया पर वीडियो देखकर सीखे और बड़े किये ! इन 50 पौधों से लगभग एक क्विंटल एपल मिलेंगे अभी और ये एपल जुलाई के अंत तक मार्केट में बेचे जाने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगे। थोक बाजार में इनकी कीमत 100 से 120 रुपए के बीच है। इनको बड़ा करने पर करीब तीन हजार रुपए खर्च आया।

हरीमन शर्मा राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं और उनके पौधे राष्ट्रपति भवन में लगे हुए हैं। यह सब देख कर मन में आया कि खेती में कुछ नया करना चाहिए। परंपरागत खेती से कोई ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा था, इसीलिए ऑनलाइन 80 रुपए प्रति पौधे के हिसाब से डेढ़ सौ पौधे मंगवाए। उसके बाद 12 दिसंबर 2018 में मैंने एक बीघा जमीन पर इन पौधों को लगाया।

आलूबुखारा के पौधों पर की सेब के पौधों की ग्राफ्टिंग

किसान साथियों आपके भी मन में यह सवाल जरुर आ रहा होगा की यह एप्पल ठन्डे इलाके में होते है ऐसा केसे संभव हुआ की यहाँ गर्मी में भी लगाने लग गए किसान ने बताया की यह एप्पल के पौधे बिज से तैयार नही किये है यह ग्राफ्टिंग है ! जो की आलूबुखारा के ऊपर एपल की ग्राफ्टिंग की गई है जिससे यह पौधे 49 डिग्री सेल्सियस तक तापमान सहन कर सकते हैं और ठंड में माइनस जीरो डिग्री तक अच्छे तरीके से चल सकते हैं ।

पोधे पर लग रहे है एप्पल

सामान्यतया यदि आप एप्पल पौधे लगाते है तो वह 8 से 10 साल बाद फल देते है लेकिन ग्राफ्टिंग वाले बहुत जल्द फल दे देते है

2 साल में लग गए एप्पल

किसान ने बताया की 2020 में जब पहली बार फल लगे थे तो पौधों की हाइट लगभग 5 फीट की थी। वह फल लेने में सक्षम नहीं थे इसलिए फलों को गिरा देना पड़ा। 2021 में आज ढाई साल बाद 10 फीट के पौधों में एपल लग चुके हैं, उनमें से 35 पौधों में तो एपल पक भी चुके हैं। विनोद जाट का कहना है कि शुरू से ही कटाई छंटाई और न्यूट्रिशन को मेंटेन कर रखा था। अभी वर्तमान में एप्पल पक चुके है और यह एप्पल हिमाचली एप्पल कीतरह ही है !

पके हुए एप्पल

खेत में जल भराव के कारण 100 पौधे ख़राब हो गए

किसान ने बताया की उन्होंने इन एप्पल के लिए काफी ज्यादा मेहनत की लेकिन अफसोस की बात यह की खेत में जल भराव के कारण 100 पौधे ख़राब हो गए खेर किसान की मेहनत रंग लायी है और आज एप्पल लग रहे है और कई सरे एप्पल पक चुके है

कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में पढ़ाने की जॉब छोड़ कर संभाली खेती, अन्य नए खेती पर कर रहे हैं नवाचार

विनोद कुमार जाट ने ग्रेजुएशन के बाद पीजीडीसीए किया था और उसके बाद एक कंप्यूटर इंस्टिट्यूट में पढ़ाने का काम करते थे, लेकिन वेतन ज्यादा नहीं होने के कारण और परिवार में भी कुछ प्रॉब्लम होने के कारण उन्होंने अपनी खेती संभालने का जिम्मा लिया। परंपरागत खेती में ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ तो उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर खेती करने के नए-नए तरीके सीखना शुरू किया। इस बीच उन्हें हरीमन शर्मा के पौधों के बारे में पता चला। इसके अलावा विनोद जाट ने मोहाली, पंजाब से काले गेहूं, नीमच से काला चना, एमपी से लाल मक्का, छत्तीसगढ़ से ग्रीन राइस मंगवा कर ट्राई किया है। अब वो रंगीन कपास के पौधे मंगवा कर एक ट्राई करना चाहते हैं।

जिला कलेक्टर आये खेत पर प्रोत्साहित किया

विनोद के कार्य का जब चितोड़ के जिला कलेक्टर व कृषि विभाग अधिकारी को पता चला तो उनके खेत पर दोरा करने आये विनोद का कहना है की साहब ने मुझे प्रोत्साहित किया और ज्यादा पैमाने में एप्पल लगाने के लिए बोला ताकि सभी को सुविधा मिल पाए ! इसके अलावा उन्होंने अन्य किसानों को भी प्रोत्साहित किया और कहा की खेती में इस तरह के नए प्रयोग करने चाहिए।

वहीं कृषि विस्तार के सहायक निदेशक शंकर लाल जाट का कहना है कि हमारे जिले में पहली बार एपल की खेती हुई है और यह एकमात्र किसान है जो यह खेती कर रहे हैं। इसलिए हमने भी सहयोग देने का सोचा। समय-समय पर हमारे द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है। कोई प्रॉब्लम होने पर किसान विनोद हमें बताते हैं तो हम उसके उपाय भी ढूंढते हैं। टेक्निकल जो भी हेल्प चाहिए वह सब कर रहे हैं। शंकर लाल जाट का कहना है कि उन्होंने इस पर एक कवर लगाने का भी आईडिया दिया है, जिस पर जल्द ही वर्क किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर अच्छे से एपल हुए तो बाहर अन्य राज्यों से मंगवाने का ट्रांसपोर्ट का खर्चा बच जाएगा और लोकल को भी सस्ते एपल खाने को मिलेगा।

किसान के खेत पर जिला कलेक्टर व कृषि विभाग अधिकारी

विनोद ने बताया की एप्पल के पौधे का यह राजस्थान का एकमात्र बगीचा है जहा पर फल लगे हुए है और विनोद का आगे का मानस है की यह अब बड़े पैमाने एप्पल की खेती करेंगे साथ ही और कई खेती में नवाचार भरेंगे आप भी किसान से मिल सकते है चितोड़ गढ़ (मेवाड़) के भदेसर उपखंड सोनियाणा ग्राम में और खेती की जानकारी ले सकते है

खेती किसानी टीम विनोद के इस कार्य से प्रसन्न होकर यह कहानी साझा करती है इसे किसानो पर गर्व है !! आपका फर्ज है इस कहाँनी को ज्यादा से ज्यादा किसानो के साथ साझा करना !!

जय जवान !! जय किसान !! जय मेवाड़ !!

धन्यवाद

किसान – विनोद कुमार जाट सोनियाणा

लेखक – गमेर सिंह राणावत

कहानी स्त्रोत – विनोद कुमार जाट

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